जयपुर। राजस्थान की भजनलाल सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने प्रस्तावित ‘राजस्थान समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026’ के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है। अब इसे आगामी विधानसभा सत्र में पेश किए जाने की तैयारी है।
प्रस्तावित कानून का मकसद अलग-अलग धर्मों की शादी की धार्मिक परंपराओं में दखल देना नहीं, बल्कि विवाह और उससे जुड़े कानूनी अधिकारों के लिए एक समान व्यवस्था तैयार करना बताया गया है।
शादी की रस्में अपनी, लेकिन रजिस्ट्रेशन एक कानून के तहत
UCC लागू होने के बावजूद किसी भी समुदाय की धार्मिक मान्यताओं या विवाह की पारंपरिक रस्मों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। यानी शादी का तरीका अपनी-अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार ही रहेगा।
- हिंदू समाज के लोग अपनी सप्तपदी यानी सात फेरों की परंपरा के अनुसार विवाह कर सकेंगे।
- मुस्लिम समाज में निकाह की रस्म पहले की तरह जारी रहेगी।
- सिख समुदाय में विवाह आनंद कारज की परंपरा के अनुसार ही संपन्न होगा।
- ईसाई समाज में पारंपरिक होली यूनियन की रस्म मान्य रहेगी।
यानी फेरे हों, निकाह हो, आनंद कारज हो या ईसाई विवाह की रस्म—शादी कराने की धार्मिक पद्धति अपनी जगह बनी रहेगी। बदलाव मुख्य रूप से विवाह के कानूनी पंजीकरण और उससे जुड़े अधिकारों की व्यवस्था में होगा।
शादी के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन जरूरी
प्रस्तावित कानून के तहत शादी के बाद उसका सरकारी पंजीकरण अनिवार्य होगा। इसके लिए विवाह की तारीख से 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन कराने का प्रावधान रखा गया है।
सरल शब्दों में कहें तो विवाह की रस्में अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन उसका कानूनी दस्तावेज एक ही कानून के तहत दर्ज होगा।
बहुविवाह पर पूरी तरह रोक
ड्राफ्ट में बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान भी शामिल बताया गया है। इसके साथ विवाह, तलाक, भरण-पोषण और संपत्ति में उत्तराधिकार जैसे मामलों के लिए समान कानूनी व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव है।
लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी नियम तय किए जाने की बात कही गई है।
आदिवासी समुदायों को प्रस्तावित कानून से बाहर रखा गया
प्रस्तावित UCC में अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखने का प्रावधान बताया गया है। इसका उद्देश्य आदिवासी समाज की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक प्रथाओं को संरक्षण देना है।
अब विधानसभा की बारी
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अगला बड़ा कदम विधानसभा में विधेयक पेश किया जाना है। वहां चर्चा और विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसकी अंतिम कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
राजस्थान में UCC लागू होने की स्थिति में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
यानी संदेश साफ है—शादी की रस्में अपनी-अपनी परंपरा के मुताबिक रहेंगी, लेकिन शादी का कानूनी रिकॉर्ड और उससे जुड़े अधिकार एक समान कानूनी व्यवस्था के तहत आएंगे।
