नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी को वीर सावरकर पर की गई टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मानहानि की शिकायत और निचली अदालत की ओर से जारी समन को रद्द कर दिया है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कहा कि मामले में अदालत द्वारा संज्ञान लेने से पहले जरूरी सरकारी मंजूरी नहीं ली गई थी। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने भी स्पष्ट किया कि इस मामले में राज्य सरकार की ओर से ऐसी कोई मंजूरी नहीं दी गई थी।
अदालत ने कहा कि जब आवश्यक मंजूरी ही मौजूद नहीं है, तो मामले में आगे की कार्रवाई नहीं की जा सकती। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने शिकायत और मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश को रद्द कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 17 नवंबर 2022 का है, जब भारत जोड़ो यात्रा के दौरान महाराष्ट्र के अकोला जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने वीर सावरकर को लेकर टिप्पणी की थी। इसके बाद अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे ने उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि राहुल गांधी ने जानबूझकर सावरकर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली टिप्पणी की और यह उनके खिलाफ एक सोची-समझी कार्रवाई का हिस्सा था।
मामले में निचली अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी किया था। इसके खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया था। हालांकि, इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने 4 अप्रैल 2025 को कार्यवाही रद्द करने से इनकार करते हुए उन्हें सेशन कोर्ट में रिविजन याचिका दायर करने का विकल्प दिया था।
इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या इस मामले में अभियोजन चलाने के लिए आवश्यक मंजूरी ली गई थी। राज्य सरकार की ओर से जवाब मिला कि ऐसी कोई मंजूरी नहीं दी गई है।
राहुल गांधी की ओर से पेश वकील ने इसी आधार पर निचली अदालत का समन और आगे की कार्यवाही रद्द करने की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मामले में संज्ञान लेने से पहले आवश्यक मंजूरी जरूरी थी। मंजूरी के अभाव में अदालत ने पूरी कार्यवाही को रद्द कर दिया।
इस फैसले के साथ राहुल गांधी को सावरकर टिप्पणी से जुड़े इस आपराधिक मानहानि मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है।
