Tamil Nadu Delimitation: तमिलनाडु में परिसीमन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विजय ने शनिवार को इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को लंबे समय तक बरकरार रखने की मांग पर सहमति बनी। साथ ही तमिलनाडु की सभी 39 लोकसभा सीटों में भी किसी तरह का बदलाव नहीं करने की बात कही गई।
बैठक के बाद अब राज्य विधानसभा में इस संबंध में प्रस्ताव लाने की तैयारी है। हालांकि, राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी डीएमके इस बैठक में शामिल नहीं हुई। मुख्यमंत्री विजय ने डीएमके के बैठक से दूर रहने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
543 लोकसभा सीटों को बरकरार रखने की मांग
सर्वदलीय बैठक में शामिल नेताओं ने मौजूदा 543 लोकसभा सीटों की संख्या को फ्रीज करने की मांग रखी। इसके साथ ही तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटों को भी मौजूदा संख्या पर बनाए रखने की बात कही गई।
மாண்புமிகு தமிழ்நாடு முதலமைச்சர் திரு.ச.ஜோசப் விஜய் அவர்கள் தலைமையில் தமிழ்நாட்டைச் சேர்ந்த பாராளுமன்ற உறுப்பினர்கள் பங்கேற்ற தொகுதி மறுவரையறை தொடர்பான கலந்தாய்வுக் கூட்டம் நடைபெற்றது.#CMJosephVijay pic.twitter.com/iiEU1E1V8w
— CMOTamilNadu (@CMOTamilnadu) August 8, 2026
बैठक में नेताओं ने आशंका जताई कि अगर आबादी के आधार पर परिसीमन किया गया, तो तमिलनाडु जैसे राज्यों के लोकसभा में प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर बेहतर काम किया है, उन्हें इसकी कीमत राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम होने के रूप में नहीं चुकानी चाहिए।
40-50 साल तक सीटों में बदलाव नहीं चाहती सरकार
सूत्रों के मुताबिक, तमिलनाडु सरकार चाहती है कि लोकसभा सीटों की मौजूदा व्यवस्था को अगले 40 से 50 साल तक बरकरार रखा जाए। सरकार का तर्क है कि केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्विन्यास करने से दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी घट सकती है।
तमिलनाडु सरकार का कहना है कि परिसीमन की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के साथ-साथ उनके वित्तीय हित भी प्रभावित न हों।
डीएमके ने सर्वदलीय बैठक से बनाई दूरी
मुख्यमंत्री विजय की ओर से बुलाई गई बैठक में कांग्रेस, एमडीएमके और कई अन्य दलों के नेता शामिल हुए। हालांकि, डीएमके ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया।
डीएमके के इस फैसले पर मुख्यमंत्री विजय ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली पार्टी और राज्य के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले उसके शुरुआती नेताओं की विरासत को देखते हुए उसका बैठक में शामिल नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
बैठक में कांग्रेस के चार सांसदों को भी अपनी बात रखने का अवसर मिला। सांसदों ने परिसीमन के संभावित प्रभाव और तमिलनाडु के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंताएं रखीं।
Chennai, Tamil Nadu | DMK MP Kanimozhi says, “32 MPs did not participate in the meeting and there is no clarity yet on the outcome of today’s meeting convened by the Chief Minister on delimitation. This MPs meeting has been convened with the intention of diverting attention from… pic.twitter.com/8CE1y18NoL
— ANI (@ANI) August 8, 2026
दक्षिणी राज्यों के अधिकारों पर बहस तेज
तमिलनाडु लंबे समय से परिसीमन को लेकर अपनी चिंता जाहिर करता रहा है। राज्य का तर्क है कि केवल जनसंख्या को आधार बनाकर लोकसभा सीटों का पुनर्विन्यास करना उन राज्यों के साथ अन्याय हो सकता है, जिन्होंने परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है।
राज्य सरकार चाहती है कि परिसीमन के दौरान सिर्फ जनसंख्या को ही आधार न बनाया जाए, बल्कि राज्यों के अब तक के प्रदर्शन और उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व को भी ध्यान में रखा जाए।
इसी मुद्दे को लेकर तमिलनाडु सरकार अब विधानसभा में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में परिसीमन को लेकर केंद्र और दक्षिणी राज्यों के बीच राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है।
