जाति की राजनीति खेलना बना कांग्रेस-भाजपा की मजबूरी

राजनीति में जाति के नाम पर खेला जाने वाला खेल बहुत पुराना है। भले ही कोई भी पार्टी ये कहे कि वो जाति के नाम पर चुनाव नहीं लड़ेगी फिर भी ना चाहते हुए उसे इस खेल को अपना मुख्य एजेंडा बनाना ही पड़ता है। राजस्थान में भी कमोबेश यही हाल है जहां दोनों मुख्य पार्टियां भाजपा एवं कांग्रेस चुनावी सरगर्मियों शुरू होते ही यही दावे करती चली आई के वो जातिगत चुनाव नहीं लड़ेगी ​लेकिन अंत में दोनों को ही ये खेल खेलना ही पड़ेगा। खबरों के अनुसार भाजपा और कांग्रेस के प्रदेश की 6 जातियों के संगठन ने बैठक की है ताकि उन्हें उनकी संख्या के अनुरूप टिकट मिल सके। इन जातियों के प्रतिनिधी उनकी जाति के प्रत्याशियों के परफॉर्मेंस और जनसंख्या के नाम पर टिकटों की मांग कर रहे हैं ऐसे में दोनों पार्टियों के रणनीतिकारों को भी ये बात समझ में आ गई है कि बिना जाति के आधार पर कहीं से भी चुनाव लड़ना मुमकिन नहीं है।

 

ऐसा है जातियों का पेंच

सबसे पहले बात करते हैं मीणा समाज की जिनके संगठन अखिल भारतीय मीणा समुदाय ने गत 19 अक्टूबर को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की थी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को खत लिखकर समाज के कम से कम 15 उम्मीदवारों को टिकट देने की मांग की थी। साल 2013 के चुनावों की बात करें तो कांग्रेस ने मीणा समाज के 17 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था जिनमें से केवल दो ही जीत दर्ज कर पाए थे। वहीं भाजपा ने 16 उम्मीदवारों को अपनी पार्टी से टिकट दिया जिनमें से 10 ने जीत के झंडे गाढ़े थे। राजस्थान में अनुसुचित जनजातियों के लिए 25 सीटें आर​क्षित है जिनकी जनसंख्या करीब 13.5 फीसदी है और इस 13.5 फीसदी में से 7.5 फीसद मीणा समाज की संख्या है तो चुनाव में ये समाज अहम भूमिका बहुत पहले से ही रखता आया है।

मीणा समाज के बाद आता है बैरवा समाज का नंबर जिनके संगठन अखिल भारतीय बैरवा महासभा ने 11 सीटों की मांग की है। अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाले इस संगठन की जनसंख्या 17 लाख के करीब है। 2013 के चुनावों में बैरवा समाज के 8 उम्मीदवारों को भाजपा ने मैदान में उतारा था जिनमें 4 की जीत हुई थी। वहीं कांग्रेस ने 6 उम्मीदवारों को टिकट दिए थे मगर एक भी उम्मीदवार जीत नहीं पाया।

मीणा बैरवा के बाद माली समाज का यहां काफी घनत्व है और इसका संगठन राजस्थान माली महासभा 20 सीटों की मांग कर रहा है जिसके लिए समाज ने दोनों पार्टियों को सूची सौंप दी है।