क्या राजस्थान में 19 सीटों पर होगा उपचुनाव? पायलट समर्थक विधायक पहुंचे उच्च न्यायालय।

राजस्थान में बीते दिनों प्रदेश के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बाघी होने पर सियासी सरगर्मी ने जोर पकड़ लिया और पूरे देश में राजस्थान में भी मध्य प्रदेश की तरह सरकार बदलने के कयास लगाए जाने लगे। प्रदेश के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने यह कहा कि अशोक गेहलोत की सरकार अल्पमत में है जिसके बाद कांग्रेस आलाकमान ने राजस्थान के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय, रणदीप सिंह सुरजेवाला सहित नेताओं को मामले को सँभालने के लिए भेजा। अगले दिन विधायक दल की बैठक बुलाई गयी जिसमें सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायक शामिल नहीं हुए और बैठक के बाद के बाद अशोक गेहलोत ने मौजूद विधायकों के साथ मिलके विक्ट्री साइन दिखाया और सभी विधायक 5 सितारा होटल में भेज दिए गए। इस पर कांग्रेस के प्रवक्ताओं ने कहा की सरकार स्थिर है और अशोक गहलोत के पास ज़रुरत से ज़्यादा समर्थक विधायक हैं। कांग्रेस ने प्रदेश की इस सियासी उठापठक या अस्थिरता लाने के लिए भाजपा को भी दोषी ठहराया। जिसके बाद भाजपा की तरफ से भी फ्लोर टेस्ट की मांग की गयी कि अशोक गहलोत बहुमत साबित करें। दूसरी विधायक दल की मीटिंग में शामिल नहीं होने पर कांग्रेस आलाकमान ने कड़ा रुख अपनाया और सचिन पायलट को प्रदेश अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री पद से मुक्त कर दिया।

पायलट समर्थक विधायक पहुंचे हाई कोर्ट।

विधायक दल की दोनों ही मीटिंग्स में शामिल नहीं होने के बाद सचिन पायलट और समर्थक विधायकों के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष की ओर से नोटिस जारी हुआ और अब पायलट समर्थक विधायक सदस्यता रद्द होने को लेकर हाई कोर्ट पहुँच चुके हैं। हाई कोर्ट में याचिका पृथ्वीराज मीणा द्वारा दाखिल की गयी जिसकी सुनवाई गुरूवार को ही होनी है।

अब देखना यह होगा कि राजस्थान में जब अशोक गहलोत अपनी सरकार को लेकर आश्वस्त दिख रहे हैं ऐसे में अब पायलट का अगला कदम क्या होगा क्यूंकि अगर उनके पास ज़रूरी आकड़े नहीं होंगे तो वह भाजपा के पाले में कदम नहीं रखेंगे उनकी खुद की पार्टी पहले ही वापिस लौटने के मौके देने के बाद मुँह मोड़ चुकी है। ऐसे में अगर इन सभी की सदस्यता रद्द होती है तो राजस्थान में उपचुनाव होने की पूरी संभावना है तो क्या पायलट समेत समर्थक विधायक तीसरे मोर्चे के तौर पर चुनाव लड़ेंगे या निर्दलीय।