कुंभलगढ़ किले पर पढ़ी जानी थी नमाज़, करणी सेना की लगातार चेतावनी के बाद कार्यक्रम रद्द

राजस्थान के ऐतिहासिक किले कुंभलगढ़ में जश्ने गरीब नवाज़ उर्स के मौके पर पढ़ी जाने वाली नमाज़ का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। जानकारी के अनुसार गरीब नवाज़ के सालान उर्स के बाद 12 मार्च के दिन ऐतिहासिक किले पर नमाज़ अदायगी का कार्यक्रम रखा गया था। नमाज़ आयोजन के लिए बकायदा पंपलेट भी छपवाए गए थे। ये पैंपलेट सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गए जिसके बाद एक समुदाय विशेष के लोग इस कार्यक्रम के विरोध में आ गए।

बता दें कि इस सरकार और प्रशासन की मंजूरी मिलने के बाद ही इस कार्यक्रम को किले पर आयोजित करना तय किया गया था। इस पोस्टर के वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने राजस्थान की कांग्रेस सरकार पर एक समुदाय विशेष की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया है। ट्विटर,फेसबुक और वॉट्सएप पर लोगों द्वारा कड़ा विरोध दर्ज कराया जा रहा है।

 

करनी सेना अध्यक्ष ने किया कड़ा विरोध

वैसे बता दें कि करनी सेना द्वारा काफी समय से आयोजकों को कार्यक्रम नहीं करने की चेतावनी दी गई थी। करनी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल अम्मू ने साफ शब्दों में कहा कि राजस्थान की आन बान शान कुंभलगढ़ के किले पर ऐसे कार्यक्रम का आयोजन संगठन कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। अभी कुछ ही दिनों पहले अम्मू ने एक कार्यक्रम में कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि हमारे इतिहास और गौरव के परिचायक इस किले पर कोई गैर-सामाजिक आयोजन किया जाता है तो पूरे हिंदूस्तान भर से राजस्थान में कांग्रेस सरकार का विरोध करने समाज के लोग एकजुट हो जाएंगे।

मामले के ज्यादा तूल पकड़ लेने के बाद से आयोजकों ने बकायदा प्रशासन के नाम एक पत्र लिखा। पत्र में मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा अब किले पर ना ही तो कोई इस तरह का आयोजन करने और ना ही नमाज़ पढ़े जाने के बारे में लिखा गया था।

गौरतलब है कि कुंभलगढ़ राजस्थान के ऐसे किलों में से एक है जिसपर मुगल सल्तनत के बड़े से बड़े बादशाह भी कभी फतेह हासिल नहीं कर सके। इस किले का इतिहास जितना पौराणिक और गौरवशाली है उससे भी ज्यादा रोचक है इसकी बनावट। 36 किलोमीटर से भी ज्यादा फैली इस किले की उंची उंची दीवारें चीन की दीवारों के बाद सबसे बड़ी दीवार है। ये इतनी विशाल है कि एक समय 8 से 10 घोड़े इस पर एकसाथ आराम से दौड़ सकते हैं।