तो ऐसे राजस्थान में गहलोत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की धज्जियां उड़ाईं!

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता वाली राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की धज्जियां उड़ाई है। अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स में छपी रिपोर्ट के हवाले से खबर है कि सरकार ने राजस्थान के पूर्व डीजीपी ओपी गल्होत्रा का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्हें पद से हटाकर नए डीजीपी के रूप में कपिल गर्ग को नियुक्ति दे दी। जबकि गल्होत्रा का कार्यकाल अभी 10 महीने का और बचा था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि डीजीपी स्तर पर नियुक्ति देते समय संबंधित व्यक्ति को कम से कम दो साल तक अपनी सेवाएं देनी होंगी और चाहे प्रदेश में सरकारें बदल जाए कोई भी मुख्यमंत्री डीजीपी को उसके पद से दो साल पहले हटा नहीं सकता है। गहलोत सरकार आने के 10 दिन के भीतर ही पूर्व डीजीपी ओपी गल्होत्रा को हटाकर उन्हें डीजीपी होम गार्ड बना दिया गया और अपने चहेते अफसर कपिल गर्ग जो कि वसुंधरा सरकार में पुलिस हाउसिंग एंड कंस्ट्रक्शन के चेयरमैन थे उन्हें डीजीपी का पद दे दिया।

क्या थे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

ब्यूरोक्रेसी में राजनीतिक पक्षपात को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएएससी को तीन वरिष्ठ अधिकारियों का पैनल बनाकर डीजीपी स्तर के अधिकारियों का चुनाव करने की स्वायत्ता दी थी जिसके बाद उन्हें साफ आदेश दिया गया था कि उक्त अधिकारी को कम से कम दो साल तक अपनी सेवाएं देनी होगी। राजस्थान सरकार ने पुलिस कानून सुधार को तोड़कर कपिल गर्ग को नियुक्ति दी है।

छत्तीसगढ़ में भी तोड़ा नियम

छत्तीसगढ़ में भी बघेल सरकार ने ठीक ऐसे ही सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना की है। यहां साल 2014 से पुलिस विभाग के उच्च पदों पर कार्य करते आए ए.एन उपाध्याय को उनका डीजीपी कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद से हटाकर डीएम अवस्थी को कार्यकारी डीजीपी बनाया गया है।