कही सुनी: विश्लेषकों ने कहा युनुस और मानवेंद्र को जमींदोज करने के लिए दी गईं ऐसी सीटें

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भाजपा कांग्रेस के लिए हॉट सीट माने जा रहे कुछ क्षेत्रों पर प्रत्याशियों के नाम सामने आने के बाद बहस छिड़ गई है। सबसे पहले बात कांग्रेस की करें तो उसने वसुंधरा राजे के सामने नए नवेले मानवेंद्र को उतार दिया है जिसके बाद विश्लेषकों का दावा है कि कांग्रेस का ये फैसला उसके लिए घातक साबित हो सकता है।

दूसरी तरफ भाजपा ने टोंक में सचिन पायलट के सामने युनुस खान को मैदान में उतारा है जो कि दोनों पार्टियों के लिए ही हॉट सीट है। वसुंधरा ने भले ही युनुस को चुनाव लड़ाने के भरपूर प्रयास किए हैं और वो उन्हें टिकट दिलाने में कामयाब भी हुईं जानकारों का कहना है कि युनुस अपनी इच्छा के अनुरूप टोंक से चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

युनुस ने अपनी पारंपरिक सीट डीडवाना से ही चुनाव लड़ने का मन बना रखा था मगर उनका नाम शुरूआती सूचियों में आया ही नहीं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा पर एक अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारने का दबाव था जिसमें युनुस को बलि का बकरा बना दिया गया है।

कहा तो ये भी जा रहा है कि युनुस टोंक के मुसलमानों का दिल जीतने में नाकामयाब साबित होंगे जिसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिलेगा और पायलट मुसलमान ही नहीं बल्कि गुर्जर और बाकि जातियों के वोट भी अपने खाते में कर लेंगे।

मानवेंद्र की बात करें तो राजपूतों को अपनी तरफ झुकाने के लिए मानवेंद्र कांग्रेस में आए थे और शुरूआत में तो माना जा रहा था कि कांग्रेस मानवेंद्र को बाड़मेर से ही टिकट देगी। मगर सब चीजों से परे मानवेंद्र को झालावाड़ के रूप में ऐसी सीट दे दी गई है जिसपर मानवेंद्र का ​प्रतिद्वंदी वसुंधरा के सामने टिक पाना भी मुश्किल होगा। वैसे अपनी सफाई में कांग्रेस का कहना है कि मानवेंद्र को ये सीट काफी सोच समझकर दी गई है और मानवेंद्र उन्हें यहां कड़ी टक्कर दे सकते हैं।

 

चुनौतियों का अंबार बना सांगानेर

एक और ​हॉट सीट मानी जा रही जयपुर की सांगानेर को लेकर तो चर्चाओं का बाजार और भी गर्म है। यहां चुनौतियों का अंबार है जिसमें भाजपा और कांग्रेस दोनों के फंसने की आशंका है। सांगानेर में कांग्रेस की ओर से पुष्पेंद्र भारद्वाज को उतारा गया है वहीं भाजपा ने जयपुर के मेयर अशोक लाहोटी के नाम पर मुहर लगाई है।

भाजपा के ​बागी विधायक घनश्याम तिवाड़ी यहां से अब अपनी ही पार्टी भारत वाहिनी से खड़े होंगे। आपको बता दें कि घनश्याम तिवाड़ी यहां से वर्तमान विधायक हैं और सबसे मजबूत माने जाने वाले दावेदार भी हैं। इतना तो ठीक था मगर अब भाजपा के एक और बागी ज्ञानदेव आहूजा के निर्दलीय मैदान में आ जाने से सारे समीकरण ही बिगड़ गए हैं जिसका सबसे बड़ा असर भाजपा पर होगा। माना जा रहा है कि यहां से आहूजा सिंधी वोटों में सेंध लगा सकते हैं वहीं राम मंदिर, गौ रक्षा के मामलों पर वो हिंदू वोटों को भी अपने पक्ष में कर सकते हैं। कुल मिलाकर आहूजा कांग्रेस को नहीं बल्कि तिवाड़ी और भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बनने जा रहे हैं।