एक ही मंच पर साथ आई ‘राजनीति’

भारतीय राजनीति की असली परिभाषा क्या है ये समझना उतनी ही मुश्किल है जितना कि हमारी जिंदगी में क्या हो रहा है वो। आज एक बार फिर से राजनीति का नया रंग देखने को मिला है। आज राजस्थान और मध्यप्रदेश को अपने नए मुख्यमंत्री मिल गए हैं जिनकी ताजपोशी के लिए भव्य समारोह आयोजित किया गया।

आज सुुबह राजस्थान में अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो वहीं सचिन पायलट को उप मुख्यमंत्री की शपथ दिलाई गई। कांग्रेस के इस भव्य शपथ ग्रहण समारोह में पूरे देश से कांग्रेस के बड़े नेता शामिल हुए तो वहीं विपक्ष की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी कार्यक्रम में शामिल हुई। चुनाव से पहले आरोप प्रत्यारोप की राजनीति करने वाले वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत और सचिन पायलट मंच पर एकदूसरे से यूं मिले जैसे वो एक ही परिवार के सदस्य हों। राजे ने गहलोत को ट्विटर के माध्यम से बधाई भी दी वहीं देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी गहलोत को बधाई भेजी है।

राजे गहलोत और पायलट के बीच चुनावों से पहले वाकयुद्ध होता आया और उसके बाद जनादेश से कांग्रेस सत्ता में आई तो यहां आकर फिर से राजनीति ने अपना रंग बदल लिया और राजनीति पायलट और गहलोत के बीच आकर खड़ी हो गई। तीन दिन की कड़ी मशक्कत के बाद गहलोत को राजस्थान का मुखिया घोषित कर दिया गया जिसका जश्न मनाने पक्ष विपक्ष दोनों मंच पर मौजूद थे और अंत में राजनीति का ही जश्न मनाया गया।

मध्यप्रदेश में भी कमोबेश कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला जहां पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह भी नई सरकार की ताजपोशी में शामिल हुए। मंच पर मौजूद ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ ने शिवराज सिंह के दोनों हाथों को उठाते हुए अपने हाथ से मिलाया और जनता का अभिवादन किया। इस नजारे को देखने से भले ही इसका मतलब शिष्टाचार से निकाला जा सकता है मगर इसके बाद ये शिष्टाचार 5 साल के लिए फिर से गायब क्यों हो जाता है ये बड़ा सवाल है। अगर सच में इस देश का सही विकास करना है तो राजनीति के लिए हमेशा ऐसा मंच होना चाहिए जहां साथ हाथ मिलाने के बाद हमारे देश के नेता साथ मिलकर भी काम कर सके। हां मगर ये जरूर है कि ऐसा हो भी गया तो ‘राजनीति’ का नाम बदलकर ‘काजनीति’ जरूर हो जाएगा।