पटरी पर आया गुर्जर आरक्षण का मुद्दा अब केंद्र को करना है फैसला

गुर्जर आरक्षण का मुद्दा पटरी पर आ गया है। आज सदन में गुर्जर आरक्षण से संबंधित विधेयक को पारित कर दिया गया है। कैबिनेट मंत्री बीडी कल्ला ने सदन को जानकारी देते हुए बताया है कि अब क्रीमीलेयर की सीमा ढाई लाख से बढ़ाकर 8 लाख कर दी गई है।इसी के साथ सदन से ही गुर्जर नेताओं से आंदोलन समाप्त करने की अपील की गई है। गौरतलब है कि पिछले 6 दिन से गुर्जर समाज के लोग आंदोलनरत हैं जिसके कारण पूर्वी राजस्थान समेत कई इलाकों में व्यवस्था बेपटरी हो गई है।

गुर्जरों को क्या मिला

  • विधेयक में गुर्जरों समेत 5 जातियों को पांच फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान रखा गया है
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  • विधेयक पारित होने के बाद अब गुर्जरों समेत 5 जातियों को सरकारी नौकरियों में और शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश मिल जाएगा

 कहाँ अटक सकता है मामला

  • राजस्थान में कांग्रेस सरकार ने गुर्जर आरक्षण संबंधी विधेयक पारित कर तो दिया है मगर इसमे एक पेंच फंसकर रह गया है।
  • बता दें कि आज लोकसभा का आज आखरी दिन था और आज के आज ही ये विधेयक संसद तक नही पहुंच पाएगा।
  • चूंकि अब इस विधेयक पर केंद्र के ही हस्ताक्षर होने है तो ऐसे में 7 मार्च को आचार संहिता लगने से पहले केंद्र सरकार को इसपर फैसला लेना होगा।

क्या हो सकते हैं इसके राजनीतिक मायने

अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने गुर्जरों को 5 फीसदी आरक्षण देकर लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए चुनावी बिसात बिछा दी है। कांग्रेस को इसका फायदा तो मिलेगा ही साथ में राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट यदि लोकसभा चुनाव लड़ते हैं तो उन्हें यहाँ से गुर्जरों का समर्थन प्राप्त हो सकता है। वहीं भाजपा को भी गुर्जरों को आरक्षण देने का सीधा लाभ मिल सकता है। इसका गणित बस इतना ही है कि अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में पहुंच चुकी है और विधेयक पर हस्ताक्षर के बाद भाजपा इसे अपने प्रचार अभियान में शामिल करेगी और पूरी तरह भुनाने की कोशिश करेगी।