गैंगस्टर विकास दुबे मुठभेड़ में क्या है जो गले नहीं उतर रहा?

उत्तर प्रदेश के कानपूर में 3 जुलाई २०२० सुबह सुबह एक ऐसी खबर आयी जिसने उत्तर प्रदेश सर्कार के साथ साथ लोगों को हिला दिया। कानपूर में पुलिस की एक टीम गैंगस्टर विकास दुबे के घर एक मामले में रेड करने जाती है. पुलिस की पहुँचते ही पुलिस और विकास दुबे के गुर्गो की मुठभेड़ होती है और आपस में फायरिंग होती है, जिसमें पुलिस की टीम से 8 लोग मारे जाते हैं. इस खबर के बहार आने से पूरे मीडिया समूह इस खबर को चलते हैं और देशभर में विकास दुबे के बारे में लोग चर्चा करते हैं. विकास दुबे फरार हो जाता है, उत्तर प्रदेश पुलिस उसे ढूंढने में अपनी पूरी जान झोंक देती है क्यूंकि अब पुलिस पर सवाल खड़े होने शुरू हो जाते हैं. ऐसे में खबर आती है की पुलिस से ही उसे रेड के बारे में पहले ही पता चल और वह पहले ही सतर्क हो गया था जिसके बाद मुठभेड़ में पुलिस की टीम के 8 लोग मारे जाते हैं.

पुलिस अब विकास दूबे को ढूंढ़ने के लिए 5 लाख रुपये का इनामी अपराधी घोषित करती है उसके बाद 8 जुलाई को गैंगस्टर विकास दुबे का दांया हाथ कहे जाने वाला अमर दुबे मध्य प्रदेश भागने की नाकाम कोशिश में हमीरपुर में एसटीएफ की टीम के साथ मुठभेड़ में मारा जाता है. जिसके बाद खबर आती है की विकास दुबे नॉएडा में किसी न्यूज़ चैनल पर लाइव आकर सरेंडर करेगा जिसके बाद पूरी फिल्मसिटी छावनी में तब्दील हो जाती है जगह जगह नाकाबंदी और बैरिकेडिंग होती है. 9 जुलाई को खबर आती है की विकास दुबे मध्य प्रदेश में उज्जैन महाकाल उज्जैन महाकाल से गिरफ्तार किया गया। गार्ड बताता है की वह पीछे के दरवाज़े से अंदर जाने की कोशिश कर रहा था संदिग्ध होने का शक होने पर उसने उसे रोक लिया और वहीँ पर पुलिस को तुरंत इन्फॉर्म कर दिया गया, पुलिस के आने तक वह भागने की कोशिश भी नहीं करता है जिसके बाद पुलिस जब उसे ले जाती है तो वह चिल्लाकर बताता है की मैं विकास दुबे हूँ कानपूर वाला मीडिया में यह वीडियो पूरे दिन चलती है मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री अपनी पुलिस टीम की जांबाज़ी पर शाबाशी देते हैं. विकास दुबे की माँ बताती है की वह हर साल महाकाल के दर्शन करने जाता था और उसका ससुराल भी मध्य प्रदेश में है। विकास दूबे से पूछ ताछ होती है और उसको उत्तर प्रदेश कानपूर लाने की तैयारियां होती हैं.

10 जुलाई सुबह खबर आती है की विकास दुबे पुलिस एनकाउंटर में मारा गया जब एसटीएफ की गाडी कानपूर पहुँचने पर पलट जाती है और पुलिस के मुताबिक 4 पुलिसकर्मी घायल हो जाते हैं अब विकास दूबे पिस्तौल छीनकर भागने की कोशिश करता है और मारा जाता है. उसे हॉस्पिटल ले जाया जाता है जहाँ पर उसे मृत घोषित कर दिया जाता है। कहानी की तरह इसे इसलिए लिखा क्यूंकि सुनने में भी आपको ये एक फ़िल्मी कहानी जैसा लगा होगा, कई सवाल आपके ज़हन में आये होंगे लोगों ने फ़र्ज़ी एनकाउंटर कहकर सोशल मीडिया पर तरह तरह की बातें की.

कुछ सवाल जो लोग सोशल मीडिया के माध्यम से उत्तर प्रदेश पुलिस से पूछ रहे हैं.

  • विकास दूबे सफारी गाडी में देखा जाता है बाद में जो गाड़ी पलटती है वह TUV 300 होती है और एक्सीडेंट से कुछ ही दूर पहले मीडियाकर्मीयों की गाड़ी जो विकास दूबे और पुलिस वालो के साथ चल रही थी उन्हें क्यों रोक दिया जाता है ?
  • सफारी से TUV 300 में विकास दुबे को क्यों और कब लाया गया ?
  • कहीं पर भी गाड़ी के घिसटने के निशान नहीं दिखाए जाते हैं?
  • पलटी हुई कार में 4 पुलिस वाले घायल तो विकास कैसे इतनी जल्दी गाड़ी से पुलिस वाले की पिस्तौल छीनकर भागा जबकि उसे पता था साथ में पुलिस की दूसरी गाड़ी भी है ?
  • पुलिसकर्मियों को पहले दूसरे अस्पताल क्यों ले जाया जाता है जबकि बाद में वहीँ लाया जाता है जहाँ पर विकास दुबे को लाया गया था और उसे मृत घोषित किया गया था?

क्या उत्तर प्रदेश पुलिस इन सभी सवालों के जवाब देगी ?

तहसीन पूनावाला अब इस मामले को फ़र्ज़ी एनकाउंटर बताते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के साथ शिकायत दर्ज़ करा चुके हैं. कुछ सवाल उन्होंने भी अपनी शिकायत में लिखित रूप में पूछे हैं?