कच्चे तेल के दाम गिरने के बावजूद केंद्र सरकार जनता को ठगने का काम क्यों कर रही है?

भारत में जहाँ एक तरफ कोरोना महामारी से पूरा देश लड़ रहा है हर दिन कोरोना मरीज़ों की संख्या अपने पिछले दिनों का रिकॉर्ड तोड़ रही है जिसकी वजह से लोगों के काम धंधे पर काफी असर पड़ा है और जीवनशैली में भी बदलाव आ रहे हैं, वहीँ अब एक और झटका पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों को लेकर भी मिल रहा है. पेट्रोल और डीजल के रेट भी देश के कई राज्यों में 80 रुपये/लीटर के पार जा चुके हैं जिससे की विपक्ष को एक मज़बूत मुद्दा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए मिल गया है.

राजस्थान प्रदेश में गुरूवार को पेट्रोल के दाम 87.02 रुपये/लीटर देखने को मिले वहीँ डीजल के दाम 80.82 रुपये /लीटर रहे. पेट्रोल के दाम देश के कई राज्यों और पड़ोसी राज्य हरियाणा और गुजरात से ज़्यादा रहे.

प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत ने अपने एक ट्वीट के ज़रिये केंद्र सर्कार पर निशाना साधते हुए लिखा जब कच्चे तेल के दाम उच्चतम स्तर पर थे; तब कांग्रेस सरकार कम कीमत पर जनता को पेट्रोल-डीजल मुहैया करवा रही थी। आज कच्चे तेल के दाम न्यूनतम स्तर पर हैं; फिर भी भाजपा सरकार लगातार पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाकर जनता को ठगने का काम कर रही है।

केंद्र सरकार ने अभी इस मामले पर ज़्यादा कुछ नहीं कहा है पर सभी राजनैतिक दल इस मामले पर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं और धरना प्रदर्शन के ज़रिये विरोध भी कर रहे हैं. बिहार में तेजस्वी यादव ने जहाँ साइकिल रैली के ज़रिये विरोध किया वहीँ दिल्ली में मोतीनगर के पास कर्मपुरा में बैलगाड़ी से लक्ज़री गाड़ी को खींचते हुए भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। देशभर में लोग अब पसंदीदा विषय कोरोना को पीछे छोड़कर पेट्रोल और डीजल के दामों की चर्चा करने लगे हैं विपक्ष मज़बूती के साथ अपना विरोध प्रदर्शन दर्ज़ करा रहा है लेकिन हम आपको बता दें की जितना हो सके उतनी सावधानी बरतते हुए अपने काम पर या बहार निकलें और सरकार के निर्देशों का पालन भी करें क्यूंकि देशभर में अब कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं.