राजस्थान विधानसभा चुनाव: क्या इस बार चतुर्वेदी की कमजोरी बन पाएगी खाचरियावास की ताकत

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राजस्थान विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। आज बात होगी जयपुर की सिविल लाइंस विधानसभा सीट की जहां भाजपा ने फिर से डॉ.अरुण चतुर्वेदी को मैदान में उतारा है तो वहीं कांग्रेस ने फिर से प्रताप सिंह खाचरियावास पर अपना विश्वास जताया है। सिविल लाइंस विधानसभा सीट पर मुकाबला काफी टक्कर का होता है क्योंकि इस क्षेत्र में प्रत्याशी की जाति या उसका बैकग्राउंड ज्यादा महत्व नहीं रखता है। पहले ये सीट दो भागों में बंटी हुई थी जिसमें बनीपार्क क्षेत्र अलग विधानसभा सीट कहलाता था मगर बनीपार्क और सिविल लाइंस के जुड़ने के बाद यहां वोटरों की संख्या बढ़ने के साथ वोटरों का बंटवारा भी हो गया।

सिविल लाइंस में सभी जाति,समुदाय के लोग निवास करते हैं जिनमें कांग्रेस और भाजपा के पारंपरिक वोटर्स शामिल है। इस सीट पर राजस्थान की ही तरह कोई एक प्रत्याशी लगातार नहीं जीत पाया है। सिविल लाइंस सीट के बारे में बात करें तो यहां उच्च वर्ग के वोटरों की संख्या ज्यादा है मगर साथ ही यहां 40 के करीब छोटी बड़ी बस्तियां हैं जिनके लिए माना जाता है कि वो कांग्रेस का बहुत बड़ा वोट बैंक है। पिछली बार इस सीट से कांग्रेस के प्रतापसिंह खाचरियावास को अरुण चतुर्वेदी के हाथों हार मिली थी। नए नवेले चतुर्वेदी को मोदी लहर में यहां काफी बड़ा फायदा मिला था तो वहीं खाचरियावास यहां से दो बार विधायक रह चुके हैं।

प्रताप सिंह खाचरियावास (कांग्रेस)

 

शैक्षणिक योग्यता: बीए एम एमए
आपराधिक रिकॉर्ड: कोई नहीं

खाचरियावास की ताकत: निम्न वर्ग में खास पहचान और यही इनका वोट बैंक भी। रहने वाले भी इसी इलाके के हैं इसलिए जानते हैं इसलिए यहां के लोगों के मूड को पहचानते भी हैं। राजपूत होने का भी मिलता है फायदा।

कमजोरी: इनके विधायक रहते इलाके में आपराधिक तत्व हावी होने जैसे आरोप लग चुके हैं। एक विवाद में विशेष संप्रदाय का पक्ष लेने का आरोप भी इनपर लग चुका है जो पिछले चुनाव में इनकी हार का एक कारण भी रहा था। आश्वासन देने के बाद भी कई काम ऐसे हैं जो नहीं हो पाते

डॉ.अरुण चतुर्वेदी (भाजपा)

शैक्षणिक योग्यता:एलएलबी,पीएचडी
पेशा: वकील
आपराधिक रिकॉर्ड: कोई नहीं

चतुर्वेदी की ताकत: चतुर्वेदी की ताकत उनका विनम्र स्वभाव है। संघी होने के कारण उन्हें यहां स्वयंसेवकों का पूरा साथ मिलता है। ब्राहृम्ण होने के चलते ब्राहृम्ण और वैश्य वोट इनकी ताकत को और बढ़ाते हैं। उच्च वर्ग का वोटर भी इनके पेशे के चलते इन्हें काफी पसंद करता है।

कमजोरी: चतुर्वेदी की सबसे बड़ी कमजोरी जनता में बन रही उनके प्रति एक राय है और वो ये कि विधायक बनने के बाद उन्होनें एकबार भी इस क्षेत्र का दौरा नहीं किया। खासतौर पर कच्ची बस्तियों में रहने वाले लोगों को उनसे ज्यादा शिकायते रही है। चतुर्वेदी मंत्री बन गए लेकिन उनका क्षेत्र विकास के मामले में पीछे ही रह गया और उनकी यही कमजोरी इस बार उनपर भारी पड़ सकती है।