आनंदपाल सिंह एनकाउंटर : जिन्होंने मांगी सीबीआई जांच, उन्ही पर आयी आँच।

आनंदपाल सिंह एनकाउंटर जून 201८ में हुआ था जिसके बाद राजपूत समाज में काफी रोष देखने को मिला था। राजपूत समाज के लोगों एनकाउंटर को फ़र्ज़ी बताया था और समाज के लोग सांवराद में इकठ्ठा हुए थे जिसके बाद राजपूत समाज के नेता इकठ्ठा हुए और लोगों से वहां इकठ्ठा होने आह्वान किया गया। राजपूत समाज के नेता और उनके हज़ारो लाखों समर्थक वहां इकठ्ठा हुए और सीबीआई जांच की मांग की गयी। 20 दिन तक आनंदपाल सिंह के पार्थिव शरीर को अग्नि नहीं दी गयी और सांवराद में भीड़ इकठ्ठा होती रही, अंत में प्रशासन ने आनंदपाल के भाई ऋषिराज और गाँव के 5 लोगों को साथ में लेजाकर अंतिम संस्कार कराया।

सांवराद आंदोलन में आनंदपाल सिंह की बेटी चरणजीत उर्फ चीनू, महिपाल सिंह मकराना (राष्ट्रीय अध्यक्ष) श्री राजपूत करणी सेना, लोकेन्द्र सिंह कालवी, सुखदेव सिंह गोगामेड़ी, राजेंद्र सिंह गुढ़ा (कांग्रेस विधायक), गिरिराज सिंह लोटवाड़ा, सीमा रघुवंशी उर्फ़ सीमा राघव, भंवर सिंह रेता, हनुमान सिंह खांगटा इन सभी लोगों ने मुख्य तौर पर सीबीआई जांच की माँग उठायी थी। इन सभी राजपूत नेताओ समेत कुल 24 लोगों को सीबीआई रिपोर्ट में आरोपी बनाया गया है और पुलिस को फर्जी एनकाउंटर मामले में क्लीन चिट दी है। सीबीआई ने जिन 24 लोगों को आरोपी बनाया है इन पर राज्य कार्य में बाधा, हिंसा और दंगे भड़काना, पुलिस के साथ दुर्व्यवहार, भड़काऊ भाषण जैसे आरोप लगे हैं।

राजपूत समाज के नेताओ ने पुलिस प्रशासन और तत्कालीन सरकार पर यह आरोप लगाया था की यह एनकाउंटर फर्जी तरीके से किया गया है अतः इस मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच हो और इनको यह उम्मीद थी की सीबीआई जाँच में यह एनकाउंटर फर्जी साबित होगा जिसके बाद एनकाउंटर की साज़िश का पर्दाफाश होगा और दोषियों को सजा मिलेगी। लेकिन यह पूरा मामला अब सीबीआई जांच की मांग करने वाले राजपूत समाज के नेताओं पर ही उल्टा पड़ता दिख रहा है।

सीबीआई जांच की रिपोर्ट पर राजपूत नेताओं की प्रतिक्रिया :

महिपाल सिंह मकराना : सीबीआई की जांच आनंदपाल एनकाउंटर पर मांगी गई थी और फैसला आ गया समाज के खिलाफ, क्या इंसाफ है? मुंह तोड़ जवाब दिया जाएगा।

सुखदेव सिंह गोगामेड़ी : सीबीआई जांच प्रभावित है और अभी भी यह मानते हैं कि एनकाउंटर फ़र्ज़ी था और यह केंद्र में बैठे कुछ नेताओ जैसे हनुमान बेनीवाल की साज़िश है।

योगिता सिंह सांवराद : न्याय आधा भी नही और जाँच पूरी भी हुई।मुझे नही लगता की इस पूरी जाँच में कहीं भी सी॰बी॰आई ने जाँच योग्य किसी एक भी तथ्य को छूने की कोशिश की है। तत्कालीन सरकार और उसके दबाव में काम करने वाले पुलिस-प्रशासन की कारगुज़ारियों की जाँच सी॰बी॰आई को करनी थी, यहाँ सी॰बी॰आई राजनैतिक दबाव में अन्याय की लड़ाई लड़ने वाले संघर्ष समिति के सदस्यों के विरुद्ध चार्ज फ़ाइल कर क्या संदेश देना चाहती है?