अजीत डोभाल द्ववारा दिए गए संदेश की वो 4 बातें जो वाकई गौर करने लायक है

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भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने नई दिल्ली में राष्ट्र और जनता के नाम अपनी और से एक संबोधन किया। डोभाल ने देश के हालातों पर चिंता जताते हुए एक स्थिर सरकार की वकालत की है। उन्होनें राष्ट्र सुरक्षा और भ्रष्टाचार को केंद्र में रखते हुए अपना भाषण दिया है जिसपर गौर किया जा सकता है। पढ़िए उनके भाषण के कुछ अंश

देश की भीतरी हालातों पर: डोभाल ने देश में फैल रही नकारात्मकता पर बात करते हुए कहा कि कुछ भीतरी ताकतें देश को तोड़ मरोड़ के रख देना चाहती हैं। वो नकारात्मक बातें फैलाकर सांप्रदायिक दंगे और और जातीय संघर्षों को बल दे रही हैं मगर मौजूदा सरकार कही हद तक इसपर रोक लगाने में कामयाब हुई है।

देश को चाहिए स्थिर सरकार: आने वाले 10 सालों में यदि हमारे देश को विकास करना है तो ये बेहद जरूरी है कि यहां एक स्थिर सरकार हो। डोभाल ने कहा कि गठबंधन की सरकारों से देश में जातीय संघर्ष बढ़ेगा और अस्थिरता आएगी। वहीं गठबंधन की सरकारों से भ्रष्टाचार ज्यादा बढ़ने की संभावना है।

मंहगाई पर: डोभाल ने कहा कि हो सकता है अभी देश में महंगाई का दौर हो मगर ये दौर जल्द ही चला जाएगा। उन्होनें पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों की ओर इशारा करते हुए कहा कि हमें अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के प्रभाव से खुद को अलग रखना चाहिए और किसी के बहकावे में ना आकर उनके द्वारा दिए जाने वाले लोकलुभावनों को सिरे से नकार देना चाहिए। राष्ट्रहित में लिए जाने वाले फैसलों के अच्छे परिणाम देर से भले ही मिलते हैं लेकिन वो सुखद साबित होते हैं।

हमें चीन और अमेरिका से ये बात सीखने की जरूरत: एनएसए चीफ ने भारत की चीन से तुलना करते हुए कहा कि 70 के दशक में हमारा देश चीन से आगे था। मगर अचानक चीन हमें पछाड़ते हुए कहीं आगे निकल गया। कारण बताते हुए डोभाल ने कहा कि चीन और अमेरिका जैसे देश अपने यहां निजी क्षेत्रों को मजबूती देते हैं तभी उनकी अर्थव्यवस्था का विकास हमसे कहीं ज्यादा हो रहा है। हमारे देश में तो जब भी कोई कॉर्पोरेट डील होती है उसे हम भ्रष्टाचार से जोड़ देते हैं। ऐसी मानसिकत गलत है क्योंकि हर कॉपोरेट डील भ्रष्ट नहीं होती इसमें देश का ही फायदा होता है। उन्होनें चीन की अलीबाबा का उदाहरण देते हुए कहा कि आज ये कंपनी निजी होते हुए भी सरकारी है।