राजस्थान चुनाव: बीजेपी के लिए राम मंदिर आस्था का विषय है ना की चुनावी मुद्दा- जावेड़कर

राम मंदिर के लिए देश की लड़ाई पांच सौ साल चली है. जब चुनाव नहीं होते थे तब भी राम मंदिर की इस देश ने हमेशा मांग की और लड़ाई लड़ी

Prakash-Javadekar
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बीजेपी ने शनिवार को कहा कि राम मंदिर कभी भी उसके लिए कभी भी चुनावी मुद्दा नहीं रहा बल्कि यह आस्था और देश का मुद्दा है. इसके साथ ही उसने कांग्रेस नेताओं पर तमाम मुद्दों को लेकर राजस्थान को बदनाम करने का आरोप भी लगाया है. केंद्रीय मंत्री व बीजेपी के प्रदेश चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर ने यहां संवाददाताओं से यह बात कही.

जब उनसे संवाददाताओं ने पूछा कि क्या बीजेपी के लिए राम मंदिर इस बार चुनावी मुद्दा है? तो उन्होंने इसके जवाब में कहा कि ‘ राम मंदिर हमारा चुनावी मुद्दा कभी नहीं रहा है क्योंकि यह आस्था का मुद्दा है. राम मंदिर के लिए देश की लड़ाई पांच सौ साल चली है. जब चुनाव नहीं होते थे तब भी राम मंदिर की इस देश ने हमेशा मांग की और लड़ाई लड़ी।’ उन्होंने कहा,‘यह देश का मुद्दा है.’ जावड़ेकर ने कहा कि भाजपा राम मंदिर को चुनावी मुद्दा नहीं बना रही बल्कि वह तो इस बारे में कांग्रेस की बयानबाजी पर सवाल उठा रही है और कांग्रेस को जवाब देना चाहिए कि क्या कांग्रेस अयोध्या में राम जन्म भूमि पर राम मंदिर चाहती है या नहीं?

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गौरतलब है कि कांग्रेस लगातार बेरोजगारी, कानून व्यवस्था, किसानों के बदहाल हालात व महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर बज[ और राज्य की वसुंधरा राजे की सरकार को घेर रही है. अभी हाल ही में कांग्रेस पार्टी नेता के नेता और राज्य सभा सांसद राजीव शुक्ला ने वसुंधरा राजे सरकार पर राजस्थान को बीमारू राज्य बनाने का आरोप लगाया. इसका जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने कहा कि लगता है कि कांग्रेस के नेताओं ने राजस्थान को बदनाम करने की साजिश शुरू की है. उन्होंने कहा कि,‘कांग्रेस वाले जानबूझकर राजस्थान को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. एक तरह से कांग्रेस पार्टी के नेता राजस्थानी नागरिकों को बदनाम कर रहे हैं.’

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रोजगार पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पर्यटन, सेवा, आईटी, बुनियादी ढांचे, सरकारी सेवाओं में बड़ी संख्या में रोजगार पैदा हुए हैं और ‘ हम कांग्रेस को चुनौती देते हैं कि आओ रोजगार पर चर्चा करो. लेकिन वो चर्चा से भाग जाते हैं. वे सदन में भी चर्चा नहीं करतेहैं’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस को आत्म विश्लेषण करना चाहिए कि जो पार्टी 2014 में 16 राज्यों में थी वह अब सिमटकर केवल चार राज्यों में कैसे रह गई.