चुनावों का तो पता नहीं मगर ऐसे भाजपा ने कांग्रेस पर ले ली है मनोवैज्ञानिक बढ़त

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राजस्थान में विधानसभा चुनाव के तहत मतदान दिवस में अभी 10 दिन का समय बचा है। मगर उससे पहले ही भाजपा ने कांग्रेस पर एक मनोवैज्ञानिक बढ़त ले ली है। भाजपा ने ऐसा दो बार किया है जब उसने कांग्रेस पर कोई मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल की हो। दरअसल भाजपा ने आज कांग्रेस से पहले अपना चुनावी घोषणापत्र जारी करते हुए फिर से ये बता दिया कि पार्टी की चुनावों को लेकर तैयारी कांग्रेस से कहीं आगे है। वहीं सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस में तो घोषणापत्र को लेकर अभी मंथन ही पूरा नहीं हुआ है। इससे पहले भी भाजपा ने उम्मीदवारों की लिस्ट सबसे पहले जारी करते हुए कांग्रेस के खेमे में खलबली मचा दी थी। कांग्रेस ने जहां पहली लिस्ट निकालने में ही भाजपा के मुकाबले सप्ताहभर से भी ज्यादा का समय लगा दिया तो वहीं भाजपा ने क्रमश: दूसरी,तीसरी और आखिर में पांचवी सूची जारी करने में आगे रही वहीं कांग्रेस अंत तक टिकट वितरण को लेकर ही जूझती दिखाई दी।

                                          वित्त मंत्री अरुण जेटली और वसुंधरा राजे घोषणापत्र जारी करने के दौरान

 

घोषणापत्र पहले जारी करने के क्या है सही मायने

भाजपा के घोषणापत्र पहले जारी करने से पार्टी ने कांग्रेस को कोई सवाल करने का मौका ही नहीं दिया है। वैसे भी भाजपा ने अपने घोषणापत्र में किसान से लेकर बेरोजगारी और महंगाई सबको शामिल किया है जिन्हें कांग्रेस मुद्दा बनाती आई है। और वैसे भी कांग्रेस नेता अपनी सभाओं में साफ कर चुके थे कि वो किसानों और बेरोजगारों के मुद्दे अपने घोषणापत्र में शामिल करेंगे। लिहाजा अब जनता यदि पार्टियों के घोषणापत्रों को गंभीरता से लेती है तो उन्हें कांग्रेस के घोषणापत्र में भी वही बातें मिलेंगी जो भाजपा ने आज अपने घोषणापत्र में पहले से ही कर दी है। इस बार भी भाजपा की चुनावी रणनीति मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने में कामयाब हुई है जिसका असर चुनाव के नतीजों पर पड़ने की संभावना भी है।

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